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दुनिया को हजम क्यों नहीं हो रही ये बात! ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति से पूछा- "क्या अमेरिका से हथियार खरीदोगे?"

 Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Sep 28, 2026 02:38 pm IST,  Updated : Sep 28, 2026 02:41 pm IST

ट्रंप को लेकर एक बार फिर हैरान करने वाली खबर सामने आई है कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पूछा है कि क्या वह अमेरिका से हथियार खरीदेंगे? उनके इस सवाल ने कई सवालों को जन्म दे दिया है।

Trump And Jinping - India TV Hindi
ट्रंप ने की थी जिनपिंग से बात Image Source : AP

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने अलग अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उनके बयान भी दुनियाभर में चर्चा में रहते हैं। इस बीच खबर सामने आई है कि डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से डायरेक्ट पूछ लिया था कि क्या वह अमेरिका से हथियार खरीदना चाहते हैं? चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू ने रविवार को ये जानकारी दी। 

ट्रंप ने ताइवान को हथियारों की बिक्री को जायज ठहराया

चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू ने बताया कि ट्रंप ने ताइवान को अमेरिका द्वारा हथियारों की बिक्री की बात, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने सही ठहराई और कहा कि ये तो वाशिंगटन द्वारा दुनियाभर में की जाने वाली कई बिक्री में से एक है। इसी दौरान ट्रंप ने जिनपिंग से पूछा कि क्या वह अमेरिकी हथियारों के बाजार में रुचि रखते हैं।

अमेरिका के लिए क्या है खतरा?

चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू ने बताया कि ये मामला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि ट्रंप द्वारा जिनपिंग को दिया गया ये प्रस्ताव अप्रत्याशित है। अगर चीन, अमेरिका से हथियार खरीदता है तो चीन और ताइवान के प्रति अमेरिका की पीढ़ियों पुरानी नीति उलट जाएगी और संभावित रूप से अमेरिकी टेक्नालॉजी एक संभावित दुश्मन के सामने उजागर हो जाएगी। 

ट्रंप ने कब दिया जिनपिंग को ये प्रस्ताव?

डेविड पर्ड्यू ने साफ कहा कि ट्रंप ने अपने उभरते प्रतिद्वंद्वी को अमेरिका द्वारा हथियारों की बिक्री की संभावना जताई है। बता दें कि ट्रंप द्वारा वाशिंगटन में शी जिनपिंग की राजकीय यात्रा की मेजबानी करने के कुछ दिनों बाद, डेविड पर्ड्यू ने "फॉक्स न्यूज संडे" पर शैनन ब्रीम से बात करते हुए यह स्पष्ट नहीं किया कि यह ट्रंप द्वारा जिनपिंग को ये  प्रस्ताव कब दिया गया था।

बता दें कि ब्रीम ने ताइवान को चीन के आक्रमण के खतरे से बचाने के लिए दी जा रही सहायता और हथियारों के आदेशों में देरी को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों की चिंताओं का हवाला दिया था। ब्रीम ने पूछा कि क्या अमेरिका, पिछले सप्ताह ट्रंप से मिलने आए चीनी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए ताइवान को सहायता देने से इनकार कर रहा है।

इस पर परड्यू ने खंडन करते हुए कहा कि ट्रंप ताइवान के मामले में उतने ही सख्त हैं जितना मैंने किसी को देखा है और उन्होंने ताइवान को काफी हथियार बेचे हैं। परड्यू ने यह भी कहा कि ट्रंप और शी जिनपिंग ताइवान को भविष्य में अमेरिकी हथियारों की बिक्री के बारे में बातचीत जारी रखे हुए हैं।

परड्यू ने कहा, "लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप लगातार कहते रहते हैं, 'हम दुनिया भर के अन्य लोगों को हथियार बेचते हैं।' उन्होंने एक बार राष्ट्रपति शी जिनपिंग से यह भी पूछा था कि क्या वे कुछ हथियार खरीदना चाहेंगे।"

ट्रंप के जिनपिंग को दिए गए ऑफर को लेकर क्यों हो रही हैरानी?

ट्रंप का जिनपिंग को ये ऑफर इसलिए भी खास है क्योंकि वाशिंगटन, चीन को एक बड़ा रणनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्वी मानता है, जबकि अमेरिका लंबे समय से बीजिंग को सैन्य तकनीक और हथियारों की बिक्री को लेकर कड़े नियंत्रण बनाए हुए है।

यह अजीब टिप्पणी अमेरिका और चीन के बीच रक्षा संबंधों की बिल्कुल अलग सच्चाई के बीच आई है। वाशिंगटन को सालों से इस बात की चिंता रही है कि संवेदनशील अमेरिकी सैन्य तकनीक चीन तक पहुंच सकती है। यह चिंता तब और बढ़ गई जब अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की जांच शुरू की कि मरम्मत के लिए ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका भेजे जा रहे F-35 फाइटर जेट के पार्ट्स हांगकांग कैसे पहुंच गए।

खबरों के मुताबिक, इस शिपमेंट में F-35 के ऐसे पार्ट्स शामिल थे जिन्हें अमेरिका भेजे जाते समय एक बिचौलिए के जरिए भेजा गया था। पेंटागन ने पुष्टि की है कि उसे F-35 लाइटनिंग II के बेकार हो चुके पार्ट्स से जुड़ी "शिपमेंट की समस्या" के बारे में पता है। साथ ही, पेंटागन ने कहा कि वह इन पार्ट्स को वापस पाने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए अमेरिकी अधिकारियों और इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर काम कर रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस शिपमेंट में F-35 कॉकपिट कैनोपी और वेपन्स-बे का दरवाजा शामिल था। बताया जा रहा है कि इन पुर्जों को हांगकांग भेज दिया गया, जो चीन का हिस्सा है। इससे वॉशिंगटन में यह चिंता पैदा हो गई है कि कहीं संवेदनशील टेक्नोलॉजी चीन के हाथों में न चली जाए।

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि उनकी समझ के अनुसार, इसमें शामिल पुर्जे संवेदनशील उपकरण नहीं थे। ऑस्ट्रेलिया जांच में अमेरिका और लॉकहीड मार्टिन की मदद कर रहा है।

इससे पहले एक खबर सामने आई थी कि ट्रंप के जोक पर हंसने से खुद को रोक नहीं पाए जिनपिंग। ऑटोपेन के जरिए बाइडेन का यूं उड़ाया था मजाक। (इनपुट- AP)

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